काम संबंधि
दूसरा सूत्र--
‘’ऐसे
काम-आलिंगन
में जब तुम्हारी
इंद्रियाँ
पत्तों की
भांति कांपने
लगें उस कंपन
में प्रवेश
करो।‘’
जब
प्रेमिका या
प्रेमी के साथ
ऐसे आलिंगन
में, ऐसे
प्रगाढ़ मिलन
में तुम्हारी
इंद्रियाँ
पत्तों की
तरह कांपने
लगें, उस कंपन
में प्रवेश कर
जाओ।
तुम भयभीत
हो गए हो,
संभोग में भी
तुम अपने शरीर
को अधिक हलचल
नहीं करने
देते हो। क्योंकि
अगर शरीर को
भरपूर गति
करने दिया जाए
तो पूरा शरीर
इसमें संलग्न
हो जाता है
तुम उसे तभी
नियंत्रण में
रख सकते हो जब
वह काम-केंद्र
तक ही सीमित
रहता है। तब उस
पर मन
नियंत्रण कर
सकता है।
लेकिन जब वह
पूरे शरीर में
फैल जाता है
तब तुम उसे
नियंत्रण में
नहीं रख सकते
हो। तुम
कांपने
लगोगे। चीखने
चिल्लाने
लगोगे। और जब
शरीर मालिक हो
जाता है तो फिर
तुम्हारा
नियंत्रण
नहीं रहता।














.jpg)



















