नाहक कांटों से दामन बचा कर चलते है लोग,
हमें देखो हमने तो फूलो से ही
जख्म खाये है।
हमने तो चून-चून कर पथ में फूल बिछाएं थे।
फिर भी पग-पग पर कांटे ही चुभते पाये है।
वो आयेंगे, वो आने वाले है,
वो आ रहे है।
हर सांस पर बस यहीं तो आस लगाये है।
तेरे दामन की खुशबु महकी हे हवाओं में।
फिर जानता है मन मेरा ये एक छलावा है
न वो आने वाले है, न आयेंगे कभी मैं जानती हूं
बस इस दिल को बहलाने को ये गीत बनाये है।
हमें देखो हमने तो फूलो से ही जख्म खाये है।
फूल सूख कर भी झर गए, प्रीतम तुम
नहीं आये।
शूल ह्रदय को बिंध गए, पर दर्द
कहां वो दे पाये।।
हम रोये जार-जार परंतु आंसू कहां निकल पाये।
तुम तो केवल वादा करते हो, परंतु
तुम कहां आये।
हमने अनजाने ही, खुशियां बिछाई
आँगन में अपने
परंतु खुश्क मन के तपते रेत में सब सपने मुरझाये।
फिर भी तुम न आये, देखो हम तुम्हें
कभी भुला पाये।
नाहक कांटों से दामन बचा कर चलते है लोग,
हमें देखो हमने तो फूलो से ही जख्म खाये है।
(ओशो की मधुशाला)
मनसा-मोहानी दसघरा
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