केंद्रित होने की छटवीं विधि:
मैं
फिर दोहराता
हूं: ‘’किसी
विषय को
प्रेमपूर्वक
देखो, दूसरे
विषय पर मत
जाओ, किसी
दूसरे विषय पर
ध्यान मत ले
जाओ, यही विषय
के माध्य में—आनंद।
किसी विषय को
प्रेमपूर्वक
देखो; दूसरे
विषय पर मत
जाओ। यहीं
विषय के मध्य
में—आनंद।
मैं
फिर दोहराता
हूं: ‘’किसी
विषय को
प्रेमपूर्वक
देखो, दूसरे
विषय पर मत
जाओ, किसी
दूसरे विषय पर
ध्यान मत ले
जाओ, यही विषय
के माध्य में—आनंद।
‘’किसी
विषय को प्रेम
पूर्ण
देखो........।‘’
प्रेमपूर्वक
में कुंजी है।
क्या तुमने
कभी किसी चीज
को
प्रेमपूर्वक
देखा है? तुम
हां कह सकते
हो, क्योंकि
तुम नहीं
जानते कि किसी
चीज को
प्रेमपूर्वक
देखने का क्या
अर्थ है।
तुमने किसी
चीज को
लालसा-भरी
आंखों से देखा
होगा। कामना
पूर्वक देखा
होगा। वह
दूसरी बात है।
वह बिलकुल
भिन्न
विपरीत बात
है। पहले इस
भेद को समझो।






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