संभोग : अहं-शून्यता की झलक—3
क्या आपने कभी सोचा है? आप किसी आदमी का नाम भूल सकते है, जाति भूल सकते है। चेहरा भूल सकते है? अगर मैं आप से मिलूं या मुझे आप मिलें तो मैं सब भूल सकता हूं—कि आपका नाम क्या था,आपका चेहरा क्या था, आपकी जाति क्या थी, उम्र क्या थी आप किस पद पर थे—सब भूल सकते है। लेकिन कभी आपको ख्याल आया कि आप यह भूल सके है कि जिस से आप मिले थे वह आदमी था या औरत? कभी आप भूल सकते है इस बात को कि जिससे आप मिले थे, वह पुरूष है या स्त्री? नहीं यह बात आप कभी नहीं भूल सके होगें। क्या लेकिन? जब सारी बातें भूल जाती है तो यह क्यों नहीं भूलता?






























