जब
किसी बिस्तर
या आसमान पर
हो तो अपने को
वजनशून्य हो
जाने दो—मन के
पार।
तुम
यहां बैठे हो;
बस भाव करो कि
तुम वजनशून्य
हो गए हो।
तुम्हारा
वज़न न रहा।
तुम्हें
पहले लगेगा कि
कहीं यहां
वज़न है।
वजनशून्य
होने का भाव
जारी रखो। वह
आता है। एक
क्षण आता है।
जब तुम समझोगे
कि तुम वज़न
शून्य हो।
वज़न नहीं है।
और जब वज़न
शून्य नहीं
रहा तो तुम
शरीर नहीं
रहे। क्योंकि
वज़न शरीर का है;
तुम्हारा
नहीं, तुम तो
वज़न शून्य
हो।
















