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शनिवार, 19 सितंबर 2026

66 - सखी री सुन प्रीतम रहा पुकार –(गीत) - ओशो की मधुशाला

66 - सखी री सुन प्रीतम रहा पुकार –(गीत) - मनसा-मोहनी
 

सखी री सुन प्रीतम रहा पुकार,

बोले ऐसी मधुरम वाणी,

हो ह्रदय के पार

सांसे भी अब करने लगी हे

ओशो-ओशो पुकार.....

सखी री सुन ओशो रहा पुकार।

बोले ऐसी मधुरम वाणी,

हो ह्रदय के पार.........

 

रोते है नयन हमारे,

झर-झर बहते नीर के धारे।

प्रीतम तुमने जो दर्द बसा दिया।

अब दूर खड़े क्‍यों हमें पुकारे।

एक टीस उठती है दिल में,

तुम न जानो अब दर्द हमारे,

नयन हमारे, पथ ये निहारे

दिल का हर-एक तार तुम्‍हें पुकारे।

 

कौन पुछता है इन वीरानों में,

दर्द ऐ दिल का हाल हमारे।

नहीं अब आस नहीं, क्यों ये तड़प उठी है।

कोई तो होगा वहां, दिल में एक हूक उठी है।

मिटे मिले है निशा फिर क्यों ये गर्द उठी है।

तुम्ही तो दर्द बने हो,

तुम्हें क्यों दवा को पुकारे।

(ओशो की मधुशाला)

मनसा-मोहनी दसघरा 


 

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