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शनिवार, 14 मार्च 2026

23-सदमा - (उपन्यास) - मनसा - मोहनी दसघरा

अध्याय-23

(सदमा - उपन्यास)

गले दिन नेहालता ने पेंटल को दफ्तर में फोन किया। पेंटल खुद भी नेहालता के फोन का बड़ी बेसबरी से इंतजार कर रहा था। क्योंकि उसके दोस्त का एक-एक दिन बहुत कठिनाई से गुजर रहा होगा। नेहालता ने कहां की पेंटल जी हमें जल्दी मिलना चाहिए। आप के पास तो इतवार का ही दिन होगा। और आज तो मंगलवार हुआ है। फिर भी बीच में समय नहीं मिल पायेगा क्या। उधर पेंटल ने अपनी मजबूरी बतलाई की पहले ही मैं बहुत छुट्टी कर चूका हूं, हम क्यों ने रविवार को मिलते है। एक तो हमें अधिक समय चाहिए फिर कोई ऐसा एकांत स्थान भी होना चाहिए,  जिस में हम पूरी तरह से बातों को विस्तार से एक दूसरे को समझा और समझ सके। तब दोनों ने मिल कर एक निर्णय लिया की हम रविवार के दिन नौ बजे मिलते है। ‘’गेट वे ऑफ इण्डिया’’ नेहालता ने पूछा की वहां तो बहुत अधिक भीड़ रहेगी और धूप भी बहुत तेज होगी तब वहां एकांत कहां होगा जब पेंटल ने कहां की वहां से हम स्टिमर में बैठ कर दूर एकांत अलीफैन्टा की गुफाओं में चलेगे सार दिन अपना होगा। और वहां पर एकांत भी खूब होगा।

ये बात नेहालता को भी जमी और प्रोग्राम बन गया की वह 9-30 और 10 बजे के बीच में ‘’गेट वे ऑफ इण्डिया’’ पर मिलते है। पेंटल तो सुबह ही अपनी चाय आदि पीकर लोकल में बैठ कर छत्रपति शिवाजी महाराज स्टेशन के लिए कुछ जल्दी ही पहुंच गया। उसके पास तो रेलवे का पास भी था।