दिनांक
31 मई,
1979;
ओशो कम्युन, पूना।
सूत्र:
ब्राह्मन
कहिये ब्रह्म—रत, है
ताका बड़
भाग।
नाहिंन पसु
अज्ञानता, गर
डारे तिन
ताग।।
संत—चरन
में लगि रहै, सो
जन पावै
भेव।
भीखा
गुरु—परताप तें, काढेव
कपट—जनेव।।
संत
चरन में जाइकै, सीस
चढ़ायो
रेनु।
भीखा
रेनु के लागते, गगन
बजायो
बेनु।।
बेनु
बजायो
मगन ह्लै, छूटी
खलक की
आस।
भीखा
गुरु—परताप तें, लियो
चरन में बास।।