सोलहवां
प्रवचन
26
मार्च 1978;
श्री
रजनीश आश्रम,
पूना।
प्रश्न
सार :
1-संसार
में ही
परमात्मा के
छिपे होने का
प्रमाण क्या
हो?
2-पूर्वजन्म
के पाप या
प्रारब्ध
क्षणमात्र में
कट जाते हैं
या भोगने पड़ते
हैं?
3-मैं
पचपन वर्ष का।
तीन बार विवाह
हुआ और हर बार
पत्नी की
मृत्यु। अभी
भी स्त्री के प्रति मन ललचाता
हूं। मैं क्या
करू?
4-मैं
शात हो रही
हूं या उदास? कृपया मार्ग
बताएं।
5-मैंने
सब ध्यान बंद
कर दिया है।
कृपा कर इस
दिशा में
हमारा
मार्गदर्शन
करें।
6-यह
संभावना भी तो
है कि आप के
जाने बाद आपका
संन्यास धर्म
एक वृहत संगठन
का रूप
लेगा जिसमें
पद—शृंखला और राजनीति
भी प्रविष्ट
हो जाएगी।
7-दूसरे
व्यक्ति की
उपस्थिति के
समय, भोजन
के समय ध्यान
भूल— भूल जाता
है।
8-पूरे
समय ध्यान की
स्थिति क्यों
नहीं बनी रहती?


