दिनांक 5 अक्टूबर,।970;
सांध्या,
मनाली (कुल्लू)
‘’भगवान
श्री कृष्ण के
संदर्भ में
जीसस पर चर्चा
करते समय एक
बार आपने कहा
कि जीसस के’क्रॉस'
से जिस
सभ्यता का शरम
हुआ उसका अत
आधुनिक स्थिति
में एटम बन पर
जाकर हुआ। और
आधुनिक
सभ्यता को अभी
वर्तमान
स्थिति में’क्रॉस
या वंशी के
बीच चुनाव
करना है।
कृपया इस बात
को फिर स्पष्ट
करें। तथा जिस
प्रकार’क्रॉस'
की
संस्कृति का
अंत एटम बन पर
हुआ है अभी
उसी प्रकार वंशी
से जो जीवनधारा
चली उसका भी
तो अंत
सुदर्शनचक्र
और महाभारत पर
हुआ था। मैं
यह पूछना
चाहूंगा कि आप’क्रॉस’ और
एटम बन का जोड़
बुनेगे कि
वंशी और
महाभारत का
जोड़ भारत के
लिये चुनेगे?’’
क्रॉस’ मृत्यु
का सूचक है।
कब्र पर लगता
है तो उसका अर्थ
है, और जब जीवन
पर लग जाता है
तो खतरनाक है।
लेकिन, बहुत
सारे तथाकथित
धार्मिक
लोगों ने
मनुष्य के
शरीर को कब्र
ही समझा है।
उनकी इस समझ
का परिणाम
खतरनाक होने
वाला है। और
अगर मनुष्य की
छाती पर’क्रॉस
लटका दिया
जाये, जैसे
कब पर’क्रॉस'
लगा होता है,
तो हम जीवन
को स्वीकार
नहीं करते, अस्वीकार की
घोषणा करते
हैं।

