सातवां-प्रवचन-(निजता की घोषणा)
प्रश्नः मेडिटेशन के लिए मन भी शांत होना चाहिए?मन ही अगर शांत हो, तो फिर ध्यान की जरूरत ही नहीं।
प्रश्नः नहीं हो, तो?
पागल है तू। यह तो ऐसा हुआ कि बीमार डाक्टर के पास जाए और डाक्टर कहे, स्वस्थ हो तो हमारे पास आओ ध्यान से मन को शांत करवा देंगे। पहले से शांत होने की जरूरत नहीं है। क्या जरूरत है शांत होने की? वह कोई शर्त नहीं है शांत होना, वह परिणाम है उसका, कांसिक्वेंस है।
प्रश्नः मन का अशांत होना, उसका नेचर नहीं है?
नहीं, बिलकुल नहीं। मन को अशांत करने के लिए बड़ी मेहनत उठानी पड़ती है। जिंदगी भर मेहनत की, तो थोड़ा-बहुत कर पाते हैं। फिर भी पूरा नहीं कर पाते हैं, नहीं तो पागल हो जाएं।
प्रश्नः इकबाल थे, जो बहुत बड़े शायर थे। उन्होंने अपने बेटे के लिए दुआ लिखी है। उन्होंने लिखा है कि खुदा तुझे किसी तूफां से आशनाई कर दे, कि तेरे बहार के मौजूं में...तो तूफान से आशनाई?

