प्रश्नसार:
1—दमन
के बिना अपने
स्त्रोत पर
लौटने का क्या
उपाय है?
2—पश्चिम
के मनोविश्लेषक
मन के
निर्ग्रंथन
के उपाय में
सफल क्यों
नहीं हो पाते?
3—क्या यह सच
नहीं है कि
कोई विधि तब
तक शक्तिशाली
नहीं होती जब
तक व्यक्ति
को दीक्षित न
किया जाए?
4—अगर तादात्म्य
एकमात्र पाप
है तो अनेक
विधियां ऐसा
क्यों कहती
है कि किसी
चीज के साथ
एकात्म हो
जाओ?




