नहीं सांझ नहीं भोर-(चरण दास)
ओशो जी द्वारा संत चरणदास के वचनों पर बोले गये दस अमृत प्रवचनों का संकलन जो ओशो आश्रम पूना में दिनांक 11-09-1977 से 20-09-1977 तक बोले गये थे।
पहला प्रवचन
भक्त का अतंर्जीवन
सारसूत्र:
अजब फकीरी साहबी, भागन सूं पैय।
प्रेम लगा जगदीश का, कछु और न चैये।।
राव रंक सूं सम गिनै, कछु आसा नाहीं।
आठ पहर सिमिटे रहैं, अपने ही माहीं।।
वैर प्रीत उनके नहीं, नहिं वाद-विवादा।
रूठे-से जग में रहैं, सुनैं अनहद नादा।।
जो बोलैं सौ हरिकथा, नहिं मौनै राखैं।
मिथ्या कडुवा दुरबचन, कबहूं नहिं भाखैं।।
जीव-दया अरू सीलता, नख सिख सूं धारै।
पांचों दूतन बसि करैं, मन सूं नहिं हारैं।
दुख-सुख दोनों के परे, आनंद दरसावैं।