मन बहलाने से क्या होता है, मन
के पार तो जाना है।
नई सुबह जो पास खड़ी है, उसे
बढ़ कर गले लगाना है।
युगों-युगों के बाद है जग में, इस महा यान का आना है।
टूटे बिखरे इस जीवन पथ से, एक
नई राह को पाना है।
चलना है एक राह पकड़ कर, बस नहीं
भटक तू पायेगा।।
कुछ कांटों के लगने भर से, क्या राह भटक अब जाना है।




.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)