कारे बदरा अब तो आजा, मेरी आंख के मोती ले जा।
दूर कहीं जब
मिले पिहरवा, उन चरणों में जाकर गहजा।।
प्रीतम को यूं जाकर कहना, घुटन
भरा ये हो गया जीना।
तपती धरा को अब है सहना, मानो
फूलों का है गहना।
दुख पीड़ा को पीते जाना, यूं दिल
के टुकड़े सीते रहना।
नासूर बना जख्म जिगर का, किन यादों से अब है सीना।
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