निकलंक--मेरा दीवाना साधक
यह अच्छा है कि मैं देख नहीं सकता.....पर मुझे पता है कि क्या हो रहा है। पर मैं क्या कर सकता हूं—तुम्हें तुम्हारी टेकनालॉजी के हिसाब से चलना होगा। और मेरे जैसे आदमी के साथ स्वभावत: तूम बड़ी मुश्किल में हो। मैं बंधा हूं और तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता।
आशु, क्या तुम कुछ कर सकती हो? तुम्हारी थोड़ी सी हंसी उसे शांत रखने में मदद करेगी। वह बहुत अजीब बात है कि जब कोई और हंसने लगता है तो पहला आदमी रूक जाता है। उनको नहीं, पर मुझे कारण साफ है। जो हंस रहा होता है वह तुरंत सोचता है कि वह कुछ गलत कर रहा है। और तुरंत गंभीर हो जाता है।
जब तुम देखो कि देव गीत रास्ते से थोड़ भटक रहा है तो हंसों, हरा दो उसे। वह नारी मुक्ति का सवाल है। और अगर तुम अच्छी हंसी हंसों तो वह तुरंत अपने नोट लेना शुरू कर देगा। तुमने अभी शुरू भी नहीं किया और वह अपने होश में आ गया।



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