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मंगलवार, 22 मार्च 2016

मौलिलकता का दूसरा नाह है ओशो—स्‍वामी चैतन्‍य कीर्ति

ओशो सर्वथा मौलिक हैं, क्योंकि उनकी
सत्व की अनुणतइ शाख्यों रो नहीं हुई,
उधार ज्ञान से नहीं हुई, परमात्मा के मूल
स्‍त्रोत से जुड़ने से हुई है। जो मूल से जुड
जाता है वह मौलिक हो जाता है।

ओशो कौन हैं? यह प्रश्न लाखों नए जिज्ञासुओं का भी प्रश्न है। इस प्रश्न का उत्तर देना बहुत कठिन है, क्योंकि कोई भी उत्तर बहुत छोटा और ओछा होगा, कण मात्र कह पाएंगें और एक महासागर पीछे छूट जाएगा। ओशो एक ऐसे बहु— आयामी व्यक्तित्व का नाम है— व्यक्तित्व ही नहीं, अस्तित्व का नाम है।

सोमवार, 21 मार्च 2016

चेतना की अंतहीन लहर है ओशो—अमृत साधना


 ओशो के बारे में क्‍या कहें? परम विध्वंसक?
या एक द्रष्टा जो दृष्टि बन जाता है?
निश्चित रूप से अस्‍तित्व के लिए एक प्रस्ताव कि हर
व्यक्ति को चेतना के अनुभव का आनंद लेने का जन्‍मसिद्ध अधिकार है।
ओशो दर्शन में कोई पूर्ण विराम नहीं है, यह एक—अंतहीन प्रवाह है चेतना का।
--अमृत साधना

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

बी. भालेकर—लेखक और वक्‍ता

ओशो ने ईश्‍वरवादी और ईश्‍वर-विरोधी दोनों की आंखें खोल दी है। ईश्वर वादी मंदिर में जाकर प्रभु से चूक गया और ईश्‍वर विरोधी मंदिरों से लड़कर चूक गया। बात अजीब है लेकिन यह सत्‍य है। ओशो ने हजार-हजार स्‍थानों पर ईश्‍वर को, उसके अस्‍तित्‍व को, उसकी अधिसत्‍ता को नकारा है।

बुधवार, 6 मार्च 2013

सोमदेव—टेनिस प्‍लेयर

 सोमदेव--
भारत के सर्वाधिक वरियता प्राप्‍त और लोक प्रिय टेनिस प्‍लेयर हाल ही ओशो मेडिटेशन रिज़ार्ट आए थे। वे पुणे किसी काम के सिलसिले में आए हुए थे। तब उन्‍हें मेडिटेशन रिज़ार्ट आने का भाव हुआ क्‍योंकि सोमदेव ओशो की किताबें चाव से पढ़ते है। अब वे ओशो की ध्‍यान विधियों करके देखना चाहते थे। मेडिटेशन रिज़ार्ट के रमणीय वातास में सोमदेव बहुत प्रसन्‍न और प्रफुलित हुए।