जीवन के विभिन्न आयामों पर ओशो का नजरिया-(प्रवचन-दसवां)
Misc. English discoursesजीवन के विभिन्न आयामों पर ओशो का नजरिया
अध्याय-10
प्रेमः
यह प्रेम कोई बंधन नहीं निर्मित कर सकता। और यह प्रेम ही हृदय को सम्पूर्ण आकाश के प्रति, सारी हवाओं के प्रति खोल देना है।
ईर्ष्या बहुत जटिल है। उसमें कई उपादान सम्मिलित हैं। कायरता उनमें से एक है; अहंकारी ढंग दूसरा है; एकाधिकारत्व की आकांक्षा- प्रेम की अनुभूति नहीं बल्कि पकड़ की; प्रतिस्पर्धात्मक प्रवृत्ति; हीन होने का एक गहरे में बैठा भय।
बहुत सारी बातें ईर्ष्या में सम्मिलित हैं।
खतरे मोल लेना असली मनुष्य के मूल आधारों में से एक होना चाहिये।
जिस पल तुम देखो कि चीजें स्थिर होने लगीं, उन्हें बिखरा दो।







