प्रवचन-पंद्रहवां
वर्तमान में जीना ही संन्यास है
(अंग्रेजी प्रवचनमाला ‘माई वे : दि वे ऑफ व्हाइट क्लाउड्स’ का हिंदी रूपांतर)पहला प्रश्नः
ओशो! आपने कहा है कि हमें दूसरों के साथ संबंध नहीं जोड़ना चाहिए, लेकिन हममें से अधिकतम लोग जो पश्चिम से हैं, वहां हमारे मित्र और संबंधी हैं, हमने यहां जो कुछ पाया है, उसे उनके साथ बांटकर हम उन्हें अपना सहभागी बनाना चाहते हैं।संन्यास के बारे में हमें उन्हें क्या बताना चाहिए? आपके बारे में हमें उन्हें क्या बताना चाहिए? और जो स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है, उसे हम कैसे अभिव्यक्त कर सकते हैं?
कुछ बातें ऐसी हैं, जिन्हें बताया नहीं जा सकता, तुम मौखिक रूप से उन्हें नहीं बता सकते। पर ऐसी बातों को बांटने का एक उपाय है और वह है तुम्हारे स्वयं के अस्तित्व के द्वारा।
लोगों को यह बताने के लिए कि संन्यास क्या होता है, केवल एक ही उपाय है कि तुम स्वयं एक सच्चे संन्यासी बनो। यदि तुम एक संन्यासी हो तो तुम्हारा पूरा सन्यस्त अस्तित्व ही वह सब कुछ कहेगा, जो शब्दों में नहीं कहा जा सकता है। यदि तुम वास्तव में एक संन्यासी हो तब तुम्हारी पूरी जीवन-शैली इतनी प्रेरणादायक बन जाएगी कि जिसका विचार भी नहीं किया जा सकता है।


