जिन सूत्र--(भाग--2)
सूत्र:
ण
वि दुक्खं
ण वि सुक्खं,
ण वि पीडा णेव
विज्जदे
बाहा।
णवि मरणं ण वि जणणं,तत्थेव य होई णिव्वाणं।।
156।।
ण
वि इंदिय उवसग्गा,
तत्थेव
य होइ णिव्वाणं।
ण
य तिण्हा
णे व छुहा,
तत्थेव य
होइ णिव्वाणं।।
157।।
ण
वि कम्मं
णोकम्मं,
ण वि चिंता णेव
अट्टरूद्दाणि।
ण
वि धम्मसुक्कझाणे,
तत्थेव
य होइ णिव्वाणं।।
158।।
णिव्वाणं ति
अवाहंति,सिद्धीलोगाग्गमेव य।
खेमं सिवं अणाबाहं,
जं चरंति
महेसिणो।।
159।।

