न भोग, न दमन—वरण जागरण—अठहरवां प्रवचन
मेरे
प्रिय आत्मन,
तीन
सूत्रों पर
हमने बात की
है।
जीवन
क्रांति की
दिशा में पहला
सूत्र था- 'सिद्धांतों
से, शास्त्रों
से मुक्ति।'
जो
व्यक्ति किसी
भी तरह के
मानसिक
कारागृह में
बंद है, वह
जीवन ' की
सत्य की, खोज
नहीं कर सकता
है। और वे लोग,
जिनके
हाथों में
जंजीरें है
उतने बड़े
गुलाम नहीं हैं,
जितने वे
लोग, जिनकी
आस्था पर
विचारों की
जंजीरें हैं;
वादों, सिद्धांतों,
संप्रदायों
की जंजीरें
हैं। आदमी की
गुलामी मानसिक
है।
दूसरा
सूत्र था: ' भीड़
से मुक्ति। '
भीड़ की
आंखों में
अपने
प्रतिबिंब से बचिये, पब्लिक
ओपीनियन
से बचिये।
वह दूसरी
जंजीर है।


