एक विश्वव्यापी खतरा—(प्रवचन—छ:)
हिमालय में
बसने के ख्याल
से भगवान ने
मध्य—नवम्बर
में अमरीका
छोड़ा। लेकिन
लगा कि। भारत
सरकार के
इरादे कुछ और
ही थे। तीन ही
दिनों में, भगवान के
साथ—साथ आए और
आठ से पंद्रह
वर्षों तक से
उनकी देखभाल
करते आ रहे
उनके पश्चात्य
शिष्यों को—उनका
डाक्टर, परिचारिका
और कुछ
गृहकार्य
करनेवाले—तीन
सप्ताह के लिए
प्राप्त उनके
वीसाओं की अवधि
बढ़ाने से
इनकार कर दिया
गया और उन्हें
देश छोड़ देने
के आदेश दे
दिये गये। ठीक
उसी समय, एक
इटालियन टी.वी
दल को भी वीसा
देने से मना
कर दिया गया, जो भारत आकर
भगवान का
इंटरब्यू
लेना चाहता था।
भारत
सरकार ने
शीघ्र और
प्रभावशाली
रूप से इन्हें
अलग— थलग कर
दिया था। ऐसा
लगा कि अमरीकी
अटर्नी—जनरल
एड मीज की
इच्छा (उनका
यह कथन
प्रकाशित हुआ
था: कि ‘‘मैं
उस व्यक्ति को
सीधे भारत
वापिस देखना
चाहता हूं
ताकि वह फिर
कभी दुबारा
सुनने या
देखने में न
आए’‘), भारत
का आदेश थी।
क्रिसमस के एक
दिन पहले
भगवान की निजी—सचिव
का तीन महीने
का वीसा
अलंघनीय रूप
से रद्द करके
उन्हें
संध्या से
पहले—पहले देश
छोड़ देने के
आदेश दिये गये।
इसके कुछ ही
दिनों के भीतर
भगवान उत्तर
की ओर उड़े
जहां वे
काठमांडू
(नेपाल) में इन
निष्काषित
लोगों के साथ
रह सकें।