जाना कहां है—(प्रवचन—बीसवां)
दिनांक 20 अप्रेेेल 1976 ओशो आश्रम पूूूूना।
प्रश्न–सार:1--मैं स्वयं को खोया—खोया महसूस करता हूं। पुराने जीवन में वापस लौटने के लिए कोई मार्ग नहीं बचा है और आगे भी कोई मार्ग दिखाई नहीं पड़ रहा है।
2--पतंजलि ने यह सब क्यों लिखा और आपने योग—सूत्र पर बोलना क्यों चुना, जबकि दोनों में से कोई भी हमें साधना की मूलभूत कुंजियां देने को तैयार नहीं हैं?
3--कई वर्षों से मैं साक्षी— भाव में जी रहा हूं। पर वह मुझे रोग जैसा क्यों लगता है?
4--आपके साथ मेरा अंतरंग संबंध है, फिर भी मुझे कुछ घट क्यों नहीं रहा है?
5--आपके वक्तव्य में यह विरोधाभास क्यों है?
6--मेरा मन पुराने से कैसे नाता तोड़े, ताकि नये के साथ सके?
7--अगर किसी ने लोओत्सु से संन्यास लेने के लिए पूछा होता तो उनका उत्तर होता.....
8--मेरा आपके साथ ठीक—ठीक संबंध क्या है?
9--क्या मैं ठीक मार्ग पर हूं?
10--आपके आश्रम की व्यवस्था तीन धूर्तो के हाथ में है, जो सुंदर और सरल स्त्रियों के भेषं में हैं।