दिनांक 31 मई
1976; श्री ओशो
आश्रम,
पूना।
प्रश्नसार:
1—सत्संग
क्या है? सत्संग
की महिमा क्या
है?
2—बात
करनी मुझे
मुश्किल कभी
ऐसी तो न थी
जैसी
अब है तेरी
महफिल कभी ऐसी
तो न थी
..............................................................
उनकी
आँखों ने खुदा
जाने क्या
जादू किया
कि
तबियत मेरी
मायल कभी............
3—कब
तक उलझना होगा
मुझे इन
कीचड़ों में? मुक्ति
के द्वार तक
ले जाने में
मुझे आप सहाय नहीं
करेंगे क्या?.........
4—संन्यासी
जीवन के लक्षण
क्या है? कृपया
समझाएँ।
5—प्रभु
को पाना चाहता
हूँ, लेकिन
मार्ग में
हजार बाधाएँ
खडी है। एक
पार करते ही
दूसरी आ खड़ी
होती है। मुझे
आदेश दें!
