केंद्रित
होने की
बारहवीं विधि:
‘’जब
किसी व्यक्ति
के पक्ष या
विपक्ष में
कोई भाव उठे
तो उसे उस व्यक्ति
पर मत आरोपित
करे।‘’
अगर
हमें किसी के
विरूद्ध घृणा
अनुभव हो या
किसी के लिए
प्रेम अनुभव
हो तो हम क्या
करते है? हम उस
घृणा या प्रेम
को उस व्यक्ति
पर आरोपित कर
देते है। अगर
तुम मेरे
प्रति घृणा
अनुभव करते हो
तो उस घृणा के
ही कारण तुम अपने
को बिलकुल भूल
जाते हो। और
मैं तुम्हारा
एक मात्र
लक्ष्य या
विषय बन जाता
हूं। वैसे ही
जब तुम मुझे
प्रेम करते हो
तो भी तुम
अपने को
बिलकुल ही भूल
जाते हो। और
मुझे अपना एक
मात्र विषय
बना लेते हो।
तुम अपनी घृणा
को प्रेम को
या जो भी भाव
हो, उसे मुझे
पर
प्रक्षेपित
कर देते हो।
उस दशा में
तुम आंतरिक
केंद्र को भूल
जाते हो। और
दूसरे को अपना
केंद्र बना
लेते हो।











.jpg)






