ध्यान के कमल-(साधना-शिविर)
ओशो
प्रवचन-दसवां-(ध्यान: जीवन में
क्रांति)
जीसस
ने कहा है: जो भारग्रस्त हैं, चिंता
से भरे हैं,
जिनका
मन विक्षिप्तता का बोझ हो गया है, वे
मेरे पास आएं,
मैं
उन्हें निर्भार कर दूंगा।
यही
मैं तुमसे भी कहता हूं। चिंताएं, दुख, पीड़ाएं, संताप इसलिए हैं, क्योंकि तुमने इन्हें जोर से
पकड़ रखा है। चिंताएं किसी को पकड़ती नहीं, दुख किसी को पकड़ते नहीं, आदमी ही उन्हें पकड़ लेता है।
ध्यान
की सारी प्रक्रिया दुख छोड़ने की, पीड़ा
छोड़ने की प्रक्रिया है। धन नहीं छोड़ना है, संसार नहीं छोड़ना है; छोड़ देना है दुख को पकड़ने की
वृत्ति। और एक बार यह अनुभव हो जाए कि दुख ने आपको नहीं, आपने दुख को पकड़ा हुआ था, तो जीवन में क्रांति घटित हो
जाती है। क्योंकि फिर कोई भी जान कर दुख को पकड़ नहीं सकता।


