प्रश्नसार:
1—अधिक
लोग दुःख और
पीड़ा का जीवन
ही क्यों
चुनते है?
2—हम
एक प्रबुद्ध
की आशा कैसे
कर सकते है?
पहला
प्रश्न :
आनंद
है क्या
मनुष्य के
सामने दो ही
विकल्प हैं :
सतत दुख और
पीड़ा का जीवन
या भगवत्ता और
आनंद का जीवन?
और क्या
चुनाव उनके
हाथ में है? फिर ऐसा क्यों
है कि सर्वाधिक
लोग दुख और पीड़ा
का ही जीवन
बनते हैं?
