गिलगमेश अक्काडियन महाकाव्य
वह एक राजा था, और अपने मध्य जीवन तक वह पूरी मानवता की तरह जीया - मृत्यु के प्रति सचेत हुए बिना। ऐसा नहीं कि वह मृत्यु को नहीं जानता था। बहुत से लोग मर गए थे, लेकिन वह आम भ्रम में था - जैसा कि पूरी मानवता है - कि मृत्यु किसी और की होती है, उसकी नहीं। इसलिए वह बेहोश रहता था और मृत्यु कभी कोई समस्या नहीं थी।
बेशक लोग मर रहे थे--उसने कई लोगों को मरते देखा था; वह युद्ध के मैदान में गया था - लेकिन उसने कभी भी गहराई तक प्रवेश नहीं किया था। तीर कभी उसके अपने हृदय पर ही नहीं लगा था। वह सामान्यतः तो जानता था कि मृत्यु होती है, परन्तु उसे इस बात का ज्ञान नहीं था कि यह विशेष रूप से उसके साथ भी घटित होने वाली है।
यह स्वाभाविक तर्क है। आप सदैव किसी मृत व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, अपने आप को कभी भी मृत के रूप में नहीं देखते। मरने वाला तो हमेशा कोई और ही होता है, इसलिए चिंतित क्यों हों? दूसरे मरते हैं - तुम कभी नहीं मरते।










