मनुष्य के लिए संगीत भी उतना ही महत्व पूर्ण
है जीतना की भोजन। भोजन शरीर के लिए आवश्यक है परंतु संगीत तन और मन दोनों के लिए ही
उतना महत्वपूर्ण है। पूरी प्रकृति एक संगीत लय में बह रही है। चाहे हवा की छम-छम या
झरनों का कलरव गान या पक्षियों का गायन। वो हर सुबह श्याम केवल गाते रहते है। मैं देखता
हूं कितनी ही कम प्राणियों को प्रकृति ने अनेक सूर दिये है। बहुत ही कम अधिकतर तो एक
या दो ही स्वर। परंतु लगाता उन्हीं से वह प्रकृति का गीत गाते चलते है।
संगीत से लगाव बचपन से ही था। परंतु बचपन में वो प्यास एक तड़प बन गई। परंतु ओशो से जूड़ने के बाद उस आयाम में एक तूफान आ गया। फिर साधन सुविधा भी थी। सो मैंने करीब 1992 में बांसुरी सीखनी शुरू की। समय कम मिलता था। दूसरा उस समय में सिखाने वाले भी नहीं मिलते थे। आज तो यू ट्यूब पर जहां देखो जो चाहो आप सीख सकते है।


















