मुर्शिद
लोगों को आग
और खून की बाढ़
से सावधान
करते हैं
बचने
का मार्ग
बताते हैं, और
अपनी नौका को
जल में उतारते
हैं
मीरदाद
:
क्या चाहते हो
तुम मीरदाद से?
वेदी को सजाने
के लिये सोने
का रत्न —जटित
दीपक?
परन्तु
मीरदाद न
सुनार है, न
जौहरी, आलोक—स्तम्भ
और आश्रय वह
भले ही हो।
या
तुम तावीज
चाहते हो बुरी
नजर से बचने
के लिये?
हां, तावीज
मीरदाद के पास
बहुत हैं,
परन्तु किसी
और ही प्रकार
के।
या
फिर तुम
प्रकाश चाहते
हो ताकि अपने —अपने
पूर्व —निश्चित
मार्ग पर सुरक्षित
चल सकी? कितनी
विचित्र बात
है। सूर्य है
तुम्हारे पास,
चन्द्र है, तारे हैं, फिर भी
तुम्हें ठोकर
खाने का और
गिरने का डर है?
तो फिर
तुम्हारी आंखें
तुम्हारा
मार्गदर्शक
बनने के योग्य
नहीं हैं, या
तुम्हारी आंखों
के लिये
प्रकाश बहुत
कम है। और
तुममें से ऐसा
कौन है जो
अपनी आंखों के
बिना काम चला
सके? कौन
है जो सूर्य
पर कृपणता का
दोष लगा सके?
