(सदमा - उपन्यास)
नेहालता ने घर पहुंच कर अपने माता-पिता से पेंटल का परिचय कराया की ये हमारे ही कालेज में हमारे साथ पढ़ते थे। परंतु ये हमारे सीनियर थे दो कक्षा आगे, पढ़ाई में हमारे कॉलेज में सबसे अच्छे विद्यार्थी थे। आज अचानक गली के मोड़ पर जाते हुए मिल गये। तो इन्हें घर ले आई। और सूनो गिरधारी लाल जी आज मेहमान आये है हमारे घर। इनके लिए कुछ खास बनाओ या इन से पूछ लो की इन्हें क्या पसंद है। तब पेंटल ने कहा जो भी मिलेगा वह प्रसाद स्वरूप ही होगा। नेहालता ने कहां की ये हमारे काका गिरधारी लाल खान बहुत ही अच्छा बनाते है। कहो तो तब तक एक चाय हो जाये। और गिरधारी को चाय के लिए बोल दिया और दोनों ड्राइंग रूम में बैठ गये। मां-पिता भी पास थे इसलिए वे कुछ बात नहीं कर पा रहे थे। वो जो उन्होंने बात करनी थी उसके लिए तो एकांत और निजता चाहिए। चलों फिर समय निकाल कर मिला जायेगा।
