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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

दूसरी लेश्‍या--नील लेश्‍या--

 
नील लेश्‍या दूसरी लेश्‍या है। जो व्‍यक्‍ति अपने को भी हानि पहुँचाकर दूसरे को हानि पहुंचने में रस लेता है। वह कृष्‍ण लेश्‍या में डूबा है। जो व्‍यक्‍ति अपने को हानि न पहुँचाए, खुद को हानि पहुंचाने लगे तो रूक जाये। लेकिन दूसरे को हानि पहुंचाने की चेष्‍टा करे, वैसा व्‍यक्‍ति नील लेश्‍या में है।
      नील लेश्‍या कृष्‍ण लेश्‍या में बेहतर हे। थोड़ा हल्‍का हुआ कालापन, थोड़ा नील हुआ। जो निहित स्‍वार्थ में जीते है...यह जो पहला आदमी है—जिसके बारे में मैंने कहा कि मेरी एक आँख फूट जाये—यह तो स्‍वार्थी नहीं है। यह तो स्‍वार्थी से नीचे गिर गया है। इसको अपनी आँख की फिकर ही नहीं है। इसको दूसरे की दो फोड़नें का रस है। यह तो स्‍वार्थ से भी नीचे खड़ा है।
      नील लेश्‍या वाल आदमी वह है। जिसको हम सेल्‍फिस कहते है, जो सदा अपनी चिंता करता है। अगर उसको लाभ होता है तो आपको हानि पहुंचा सकता है। लेकिन खुद हानि होती हो तो वह आपको हानि पहुंचायेंगा। ऐसे ही आदमी को नील लेश्‍या के आदमी को हम दंड से रोक पाते है। पहले आदमी को दंड देकर नहीं रोका जा सकता। जो कृष्‍ण लेश्‍या वाला आदमी है, उसको कोई दंड नहीं रोक सकते पाप से क्‍योंकि उसे फिकर ही नहीं कि मुझे क्‍या होता है। दूसरे को क्‍या होता है उसका रस....उसको नुकसान पहुंचाना। लेकिन नील लेश्‍या वाले आदमी को पनिशमेंट से रोका जा सकता है। अदालत, पुलिस, भय....कि पकड़ा जाऊं, सज़ा हो जाये तो वह दूसरे को हानि करने से रूक सकता है।
      तो ध्‍यान रहे,जो अपराधी इतने अदालत कानून के बाद भी अपराध करते है उनके पास निश्‍चित ही कृष्‍ण लेश्‍या पाई जायेगी। और आप अगर डरते है अपराध करने से कि नुकसान न पहुंच जाए। और आप देख लेते है कि पुलिसवाला रास्‍ते पर खड़ा है तो रूक जाते हे लाल लाइट देखकर। कोई पुलिसवाला नहीं है—नील लेश्‍या—कोई डर नहीं है, कोई नुकसान हो नहीं सकता। निकल जाओ, एक सेकेंड की बात है।
            एक दिन मुल्‍ला नसरूदीन अपने मित्र के साथ कार से जा रहा था। मित्र कार को भगाये लिये जा रहा है। आखिर मोटर-साईकिल पर चढ़ा हुआ एक पुलिस का आदमी पीछा कर रहा है। जोर से साइरन बजा रहा है। लेकिन वह आदमी सुनता ही नहीं है। दस मिनट के बाद मुश्‍किल से वह पुलिस का आदमी जाकर पकड़ पाया और उसने कहा कि मैं गिरफ्तार करता हूं चार कारणों से। बीच बस्‍ती में पचास-साठ मील की रफ्तार से तुम गाड़ी चला रहे हो। तुम्‍हें प्रकाश(लाल बत्‍ती) कोई फ्रिक नहीं है। रेड लाईट है तो भी तुम चलाए जा रहे हो। जिस रास्‍ते से तुम जा रहे हो, यह वन-वे है और इसमें जाना निषिद्ध है। और मैं दस मिनट से साइरन बजा रहा हूं,लेकिन तुम सुनने को राज़ी नहीं हो।
      नसरूदीन जो बगल में बैठा था मित्र के, खिड़की से झुका और उसने कहा, यू मास्ट नाट माइंड हिम आफिसर,ही इज़ डैड ड्रिंक। वह पाँचवाँ कारण बता रहा है। इस पर ख्‍याल मत करिए, यह बिलकुल बेहोश है, शराब में धुत हे। माफ करने योग्‍य है।  
      जब भी आप गलत करते है तो आप शराब में धुत होते ही है। क्‍योंकि गलत हो ही नहीं सकता मूर्छा के बिना। लेकिन मूर्छा भी इतना ख्‍याल रखती है कि खुद को नुकसान न पहुंचे, इतनी सुरक्षा रखती है। हममें से अधिक लोग कृष्‍ण लेश्‍या में उतर जाते है। कभी-कभी कृष्‍ण लेश्‍या में उतरते है। वह हमारे जीवन को रोजमर्रा का ढंग नहीं है। लेकिन कभी-कभी हम कृष्‍ण लेश्‍या में उतर जाते है।
      कोई क्रोध आ जाये, तो हम उतर जाते है और इसलिए क्रोध के बाद हम पछताते है। और हम कहते है,जो मुझे नहीं करना था वह मैंने किया। जो मैं नहीं करना चाहता था। वह मैंने किया। बहुत बार हम कहते है, मेरे बावजूद यह हो गया। यह आप कैसे कह पाते है? क्‍योंकि यह आपने ही किया। आप एक सीढ़ी नीचे उतर गए। जो आपके जीवन का ढांचा था; जिस सीढ़ी पर आप सदा जीते है—नील लेश्‍या–उससे जब आप एक सीढ़ी नीचे उतरते है तो ऐसा लगता है। कि किसी और ने आप से करवा लिया। क्‍योंकि उस लेश्‍या से आप अपरिचित है। नील लेश्‍या शुद्ध स्‍वार्थ है, लेकिन कृष्‍ण लेश्‍या से बेहतर।
ओशो
महावीर वाणी भाग:2,
प्रवचन—चौदहवां, दिनांक 29 अगस्‍त,1973,
पाटकर हाल, बम्‍बई