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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

शराब और कामवासना—

तो हम तो आपने को एक मादक बिन्‍दु बनाना चाहते है। जिसमें चारों तरफ, जिसके व्‍यक्‍तित्‍व में शराब हो और खींच ले। और महावीर कहते है कि जो दूसरे को खींचने जायेगा, वह पहले ही दूसरों से खिंच चुका है। जो दूसरों के आकर्षण पर जीयेगा वह दूसरों से आकर्षित है। और जो अपने भीतर मादकता भरेगा, बेहोशी भरेगा, लोग उसकी तरफ खीचेंगें जरूर,लेकिन वह अपने को खो रहा है और डूबा रहा है। और एक दिन रिक्‍त हो जायेगा, आरे जीवन के अवसर से चूक जायेगा।
      निश्‍चित ही, एक स्‍त्री जो होश पूर्ण हो, कम लोगों को आकर्षित करेगी। एक स्‍त्री जो मदमस्‍त हो, ज्‍यादा लोगों को आकर्षित करेंगी। क्‍योंकि जो मदमस्‍त स्‍त्री.....पशु जैसी हो जायेगी। सारी सभ्‍यता, सारे संस्‍कार, सारा जो ऊपर थ वह सब टूट जायेगा। वह पशुवत हो जायेगी। एक पुरूष भी,जो मदमस्‍त हो, ज्‍यादा लोगों को आकर्षित, ज्‍यादा स्‍त्रियों को आकर्षित कर लेगा, क्‍योंकि वह पशुवत हो जायेगा। उसमें ठीक पशुता जैसी गति आ जायेगी। और सब वासनाएं पशु जैसी हों तो ज्‍यादा रसपूर्ण हो जाती है। इसलिए जिन मुल्‍कों में भी कामवासना प्रगाढ़ हो जायेगी। उन मुल्‍कों में शराब भी प्रगाढ़ हो जायेगी। सच तो यह है कि फिर बिना शराब पिये कामवासना में उतरना मुश्‍किल हो जायेगा। क्‍योंकि वह थोड़ी सी जो समझ है वह जो बाधा डालती है। शराब पीकर आदमी फिर ठीक पशुवत व्‍यवहार कर सकता है।
      यह जो हमारी वृति है कि हम किसी को आकर्षित करें, अगर आप आकर्षित करना चाहते है किसी को तो आपको किसी न किसी मामले में मदमस्‍त होना चाहिए। जो राजनीतिज्ञ नेता पागल की तरह बोलता है, जो पागल की तरह आश्‍वासन देता है,जो कहता है कि कल मेरे हाथ में ताकत होगी स्‍वर्ग आ जायेगा पृथ्‍वी पर, वह ज्‍यादा लोगों को आकर्षित करता है। जो समझदारी की बातें करता है, उससे कोई आकर्षित नहीं होता। जिस अभिनेत्री की आंखों में शराब आपकी तरफ बहती हुई मालूम पड़ती है, वह आकर्षित करती है। अभिनेत्री के पास बुद्ध जैसी आँख हो, तो आप पागल जैसे गये हो तो शांत होकर घर लौट आयेंगे। उसके पास आँख चाहिए जिसमें शराब का भाव हो। मदहोश आँख चाहिए। उसके चेहरे पर जो रौनक हो, वह उसको जगाती न हो सुलाती हो।
      जहां भी हमें बेहोशी मिलती है, वहां हमें रस आता है। जिस चीज को भी देखकर आप अपने को भूल जाते है, समझना कि वहां शराब है। जिस चीज को भी देखकर आप अपने को भूल जाते है, अगर एक अभिनेत्री को देखकर आपको अपना ख्‍याल नहीं रह जाता, तो आप समझना कि वहां बेहोशी है, शराब है। और शराब ही आपको खींच रही है। शराब,शराब की बोतलों में ही नहीं होती, आँखों में भी होती है। वस्‍त्रों में भी होती है। चेहरों में भी होती है। हाथों में , चमड़ी में भी होती है। शराब बड़ी व्‍यापक घटना है।
      महावीर कहते है कि जो व्‍यक्‍ति इस तरह के रसों का सेवन करता है जो मादक है, और जो अपने भीतर की मादकता को मिटाता नहीं, बढ़ता है, उसकी तरफ वासनाएं ऐसे ही दौड़ने लगेंगी जैसे फल भरे वृक्ष के पास पक्षी दौड़ आते है। और जो व्‍यक्‍ति अपने पास वासनाएं बुला रहा है वह अपने हाथ से अपने बन्‍धन आकर्षित कर रहा है। वह अपनी हथकड़ियों और अपनी बेड़ियां को निमंत्रण दे रहा है कि आओ, वह अपने हाथ से अपने कारागृहों को बुला रहा है कि आओ और मेरे चारों तरफ निर्मित हो जाओ। वह व्‍यक्‍ति कभी मुक्‍त ,वह व्‍यक्‍ति कभी शांत, वह व्‍यक्‍ति कभी शून्‍य, वह व्‍यक्‍ति कभी सत्‍य को उपलब्‍ध नहीं हो सकता। क्‍योंकि सत्‍य की पहली शर्त है, स्‍वतंत्रता। सत्‍य की पहली शर्त है। एक मुक्‍त भाव, और वासनाओं से कोई कैसे मुक्‍त हो सकता है?
ओशो
महावीर वाण, भाग—2
चौथा प्रवचन, दिनांक 16 सितम्‍बर,1972
पाटकर हाल, बम्‍बई