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रविवार, 4 अक्टूबर 2026

03 - जोगी तू क्यों आया मेरे द्वार ? — (कविता) - परिजात के फूल

03 - जोगी तू क्यों आया मेरे द्वार ? — (कविता) - मनसा - मोहनी 

जोगी तू क्यों आया मेरे द्वार ?

तेरी आंखों में नहीं दिखता, सपनों का अब वो संसार।

जोगी तू क्यों आया मेरे द्वार ?

सपनों के इन इंद्र धनुष से कितने रंग सजाए है।

तेरे रंग के   आगे जोगी  सब बैरंग हो जाए है।

एक तरफ टूटे छंद मेरे थी एक तरफ आशाएं है।

जिनके पीछे दौड़ा रहा था, पाई वो छायाएं है।

छाया को क्यों तू माया सब कहता ?

भेद बता जा अब कि बार।

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

02 - मेरा प्‍याला भी भरा हुआ था -(कविता) - परिजात के फूल

02 - मेरा प्‍याला भी भरा हुआ था -(कविता) - मनसा - मोहनी 

तुम जब आये मेरे द्वार, मैं मद-अहं से भरा हुआ था।

तेरे पदचापों की ध्वनि, सुन उसे अनसुना किया था।

 

डूबा सूरज हुआ अंधेरा,

चारों और तमस न घेरा,

करुणा करके तूने मुझपर

मंदिर में दें दिया बसेरा।

मद-मंदिर में छलक रही थी,

उत्‍सव-मस्‍ती महक रही थी,

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

01- आजा हो आजा मेरे प्यार, ओशो - (गीत) - परिजात के फूल

आजा हो आजा मेरे प्यार, ओशो  - (गीत) - मनसा - मोहनी 

आजा हो आजा मेरे प्यार, ओशो...

सांसो का क्या एतबार आजा, ओशो

आजा हो आजा अबकी बार, ओशो ...।

 

जलती चीता पर जीवन बैठा।

कोई नहीं अब सब जग रूठा।

वादा करके तू हो गया झूठा।

गम भी तेरा लागे हे मीठा।

दिल को दिलाजा एतबार आजा....