जोगी तू क्यों आया मेरे द्वार ?
तेरी आंखों में नहीं दिखता, सपनों
का अब वो संसार।
जोगी तू क्यों आया मेरे द्वार ?
सपनों के इन इंद्र धनुष से कितने रंग सजाए है।
तेरे रंग के आगे जोगी सब बैरंग हो जाए है।
एक तरफ टूटे छंद मेरे थी एक तरफ आशाएं है।
जिनके पीछे दौड़ा रहा था, पाई
वो छायाएं है।
छाया को क्यों तू माया सब कहता ?
भेद बता जा अब कि बार।


