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शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

02 - मेरा प्‍याला भी भरा हुआ था -(कविता) - परिजात के फूल

02 - मेरा प्‍याला भी भरा हुआ था -(कविता) - मनसा - मोहनी 

तुम जब आये मेरे द्वार, मैं मद-अहं से भरा हुआ था।

तेरे पदचापों की ध्वनि, सुन उसे अनसुना किया था।

 

डूबा सूरज हुआ अंधेरा,

चारों और तमस न घेरा,

करुणा करके तूने मुझपर

मंदिर में दें दिया बसेरा।

मद-मंदिर में छलक रही थी,

उत्‍सव-मस्‍ती महक रही थी,

20 - धन्य हैं वे जो अज्ञानी हैं –(BLESSED ARE THE IGNORANT) का हिंदी अनुवाद

धन्य हैं वे जो अज्ञानी हैं – (BLESSED ARE THE IGNORANT) का
हिंदी अनुवाद

अध्याय  - 20

अध्याय का शीर्षक: ईश्वर लक्ष्य नहीं बल्कि यात्रा स्वयं है

25 दिसंबर 1976 अपराह्न, चुआंग त्ज़ु ऑडिटोरियम में

देव का अर्थ है दिव्य, अश्व बोधि का अर्थ है अश्व बोध। और यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि अश्व बोध क्या है। मनुष्य घोड़ों जितना समझदार नहीं है; मनुष्य ने सारी संवेदनशीलता खो दी है। घोड़े अभी भी वर्तमान में जीते हैं -- मनुष्य ने भविष्य में जीना शुरू कर दिया है। जिस क्षण आप भविष्य में जीना शुरू करते हैं, आप अश्व बोध खो देते हैं।

जानवर यहीं और अभी रहता है। वह अपने जीवन को आस्थगित भुगतान प्रणाली के रूप में नहीं बनाता। वह परिणामों के बारे में चिंता नहीं करता। वह लक्ष्य के बारे में ज्यादा चिंतित नहीं है - उसकी पूरी चिंता यात्रा ही है।

उदाहरण के लिए, यदि आप एक घोड़े को सड़क के किनारे खुला छोड़ दें, तो वह तारों की ओर नहीं देखेगा और वह क्षितिज की ओर नहीं देखेगा; वह यह देखने के लिए चारों ओर नहीं देखेगा कि उसे कहां जाना चाहिए और कहां घास खाना शुरू करना चाहिए। वह बस तत्काल चारों ओर देखेगा।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

01- आजा हो आजा मेरे प्यार, ओशो - (गीत) - परिजात के फूल

आजा हो आजा मेरे प्यार, ओशो  - (गीत) - मनसा - मोहनी 

आजा हो आजा मेरे प्यार, ओशो...

सांसो का क्या एतबार आजा, ओशो

आजा हो आजा अबकी बार, ओशो ...।

 

जलती चीता पर जीवन बैठा।

कोई नहीं अब सब जग रूठा।

वादा करके तू हो गया झूठा।

गम भी तेरा लागे हे मीठा।

दिल को दिलाजा एतबार आजा....