चल पड़ा पथ पर पथिक जब, कौन बाधा
रोकेगी उसको।
कौन डगर भटका सकेगी, दृढ़ हो विश्वास जिसको।।
देख राहों की रूकावट, तू न थकना, तू न रुकना।
आंधी और तूफान से भी, तू न डरना, न सहमना।
डिगने लगे विश्वास जब भी,
प्रेम पथ
के बीज बोना।
देख सागर की तू गर्जन,
लहर बन कर विलीन होना।
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