शिक्षा में क्रांति-ओशो
प्रवचन-सत्ताईसवां
अंकुरित होने की कला
मेरे प्रिय आत्मन्!
जीवन मिलता नहीं, निर्मित करना होता है। जन्म
मिलता है, जीवन निर्मित करना होता है। इसीलिए मनुष्य को
शिक्षा की जरूरत है। शिक्षा का एक ही अर्थ है कि हम जीवन की कला सीख सकें। एक
कहानी मुझे याद आती है।
एक घर में बहुत दिनों से एक वीणा रखी थी। उस घर
के लोग भूल गए थे, उस वीणा का उपयोग। पीढ़ियों पहले कभी कोई उस वीणा को बजाता रहा होगा। अब तो
कभी कोई भूल से बच्चा उसके तार छेड़ देता था तो घर के लोग नाराज होते थे। कभी कोई
बिल्ली छलांग लगा कर उस वीणा को गिरा देती तो आधी रात में उसके तार झनझना जाते,
घर के लोगों की नींद टूट जाती। वह वीणा एक उपद्रव का कारण हो गई थी।
अंततः उस घर के लोगों ने एक दिन तय किया कि इस वीणा को फेंक दें--जगह घेरती है,
कचरा इकट्ठा करती है और शांति में बाधा डालती है। वह उस वीणा को घर
के बाहर कूड़े घर पर फेंक आए।

