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बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

दि बुक ऑफ ली तज़ु—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

कन्‍फ्यूशियन दर्शन के बाद, ताओ वाद की बहुत बड़ी दार्शनिक परंपरा है। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में ताओ दर्शन प्रौढ़ हुआ। और तभी से ताओ ग्रंथों में किसी ली तज़ु नाम के रहस्‍यदर्शी का उल्‍लेख पाया जाता है। जी तज़ु जो हवाओं पर सवार होकर यात्रा करता था। उसकी ऐतिहासिकता भी संदिग्‍ध है। पता नहीं उसका समय क्‍या था। कुछ सुत्रों के अनुसार वह ईसा पूर्व 600 में हुआ, और कुछ कहते है 400 में पैदा हुआ। ली तज़ु एक व्‍यक्‍ति भी है, और दर्शन भी। कहते है ली तज़ु पु-तिएन शहर में रहता था। और चालीस साल तक किसी ने उसकी दखल नहीं ली। और राज्‍य के उच्‍च पदस्‍थ और राजसी परिवार के लोग उसे सामान्‍य आदमी समझते थे। चेंग में सूखा पडा और ली तज़ु ने वेइ जाने का फैसला लिया।

      उसके नाम से जो किताब प्रचलित है वह कहानियों, निबंधों और कहावतों का संकलन है। किताब के आठ परिच्‍छेद है। उनमें से ‘’याँग चु’’ शीर्षक से जो परिच्‍छेद है वह सुखवाद का समर्थन करता है। बाकी सात परिच्‍छेदों का संकलन ताओ तेह किंग और च्‍वांग तज़ु के बाद सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण किताब बन गई है। चीनी विद्वानों के मुताबिक यह किताब 300 ईसवी में संकलित की गई थी। यह ताओ वाद का दूसरा सृजनात्‍मक काल था।
      ताओ अर्थात मार्ग, या कहें वह नियम जिससे आस्‍तित्‍व की हर चीज संचालित होती है। आकाश, पृथ्‍वी और उनके बीच की असंख्‍य वस्‍तुएं जो एक नियम से जीती है—रात और दिन, ऋतुऐ विकास और विनाश जन्‍म मृत्‍यु। सिर्फ मनुष्‍य को ही उसके नियम की जानकारी नहीं है। प्राचीन समय के ऋषि जीने का सही ढंग जानते थे और राज करते थे।
      ताओ वाद बनने के लिए दार्शनिक होने की आवश्‍यकता नहीं है। उसे बौद्धिक तर्क-वितर्क में पड़ने की जरूरत नहीं है। वह लोगों को सूत्रों, कहानियों और कविताओं के द्वारा मार्ग दर्शन करता है। ली तज़ु की ताकत उसकी जीवंत अद्भुत हास्‍यपूर्ण कहानियों में है। पश्‍चिम के बुद्धिवाद मस्‍तिष्‍क के लिए ताओ कुछ ज्‍यादा ही साधारण और बेबूझ लगता है। ताओ वाद इसी विश्‍व में रहते है लेकिन उन्‍हें वह इतना निराशा जनक नहीं लगता जितना पाश्‍चात्‍य लोगों का लगता है।
      ली तज़ु के इस परिच्‍छेद में ताओ वाद का दृष्‍टिकोण झलकता है। तुम्‍हारा अपना शरीर तुम्‍हारी मलकियत नहीं है। यह एक आकार है जो तुम्‍हें धरती और आकाश ने दिया है। तुम्‍हारे जीवन पर तुम्‍हारा कोई अधिकार नहीं है, वह तुम्‍हारी ऊजाओं के बीच हुआ मेल है जो धरती और आकाश ने कुछ समय के लिए दिया है। तुम्‍हारा स्‍वभाव और तुम्‍हारी तकदीर तुम्‍हारी अपनी नहीं है, वह एक मार्ग है धरती और आकाश द्वारा बनाया हुआ। तुम्‍हारे बच्‍चे और पोते तुम्‍हारे नहीं है। धरती और आकाश ने तुम्‍हारे शरीर से पैदा किया है। जैसे कीड़े अपनी चमड़ी को छोड़ देते है। तुम धरती और आकाश की श्‍वास हो जो बाहर भीतर जाती है। तुम उस पर मलकियत कैसे कर सकते हो।
      चीनी दर्शन में ची या प्राण आस्‍तित्‍व का बुनियादी तत्‍व है जिससे विश्‍व बना है। शुन्‍य में से ची प्रगट हुआ। अपने स्‍त्रोत पर वि विशुद्ध और हल्‍का था। लेकिन सधन होते-होते उसके दो हिस्‍से बने। जो हल्‍का था वह आकाश बना और जो भारी था वह पृथ्‍वी बना।
      ली तज़ु या चीनी दर्शन बहुत विधायक है, उसे सर्व स्‍वीकार है। उसके बुनियादी तत्‍व है:
      1—जो विपरीत है वे एक दूसरे के परि पूर्वक है। और एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।
      2—व्‍यक्‍ति का होना भ्रांति है। व्‍यक्‍ति का जन्‍म और मृत्‍यु ची के अंतहीन रूपांतरण में घटने वाली घटनाएं है।
      3—शून्‍यता, जिससे हम आये है, हमारा असली घर है। उससे हम ज्‍यादा देर भाग नहीं सकते है।
      4—मृत्‍यु कैसी होती है इसकी हम कल्‍पना भी नहीं कर सकते इसलिए डरने का कोई सवाल ही नहीं है। शायद मृत्‍यु का हम जीवन से अधिक मजा ले सकते है।
      ली तज़ु का आदर्श सब कुछ त्यागना नहीं है। वरन बहुत पैनी संवेदनशीलता को जगाना और प्रतिसंवेदन करने की क्षमता है। ‘’मेरे शरीर का मेरे मन के साथ तालमेल है, मेरे मन का ऊर्जाओं के साथ मेरी ऊर्जा का आत्मा के साथ और आत्‍मा का शून्‍य के साथ तालमेल है।
      ‘’जब सूक्ष्‍म से सूक्ष्‍म चीज या हल्‍की सी ध्‍वनि मुझे प्रभावित करती है तो चाहे वह सुदूर आठ सीमाओं के पार हो या मरी भौहों और पलकों के बीच हो। मैं उसे जान जाता हूं। हालांकि मुझे यह पता नहीं है कि मैं उसे सिर के साथ छेदों द्वारा जानता हूं। या मेरे चार अंगों द्वारा या मेरे ह्रदय या पेट के द्वारा। वह केवल आत्‍मज्ञान है।
      ‘’जब मेरे भीतर और बाहर सब समाप्‍त हो गया, मेरी आंखें मेरे कानों जैसी हो गई। मेरे कान नाक जैसे, मेरी नाक मुंह जैसी हो गई। तब सब एक हो गया।
      ‘’ मेरा मन एकाग्र हुआ और शरीर शिथिल अस्‍थियां और मांस धुल मिल गया। मुझे ख्‍याल नहीं आया कि मेरा शरीर किस पर टिका है और पैर कहां जा रहे है। मैं हवा की मानिंद पूरब पश्‍चिम बहता रहा। मानो सूखा हुआ पत्‍ता या घास हो। और मैं कभी जान नहीं सका कि हवा मुझे पर सवार है या हवा पर।‘’
      अगर तुम्‍हारे भीतर कुछ भी सख्‍त नहीं हो
      तो बहार की चीजें स्‍वयं ही प्रगट कर देंगी
      गति करो तो पानी जैसे बहो
      प्रतिध्‍वनि जैसे प्रतिसंवेदित होओ
      ली तज़ु और पूरा चीनी दर्शन मृत्‍यु के अहसास से भरा है। उसकी बहुत सी कहानियां मृत्‍यु के संबंध में है।
      ताओ दर्शन में एक तरह की निर्दोषिता है जो बच्‍चों की सी सरलता से अद्भत लोक, रोमांच और किवदंतियों में विश्‍वास करती है। जैसे, उनकी कहानियों में सम्राट मरते समय आकाश में उड़ जाता है। यह हकीकत तो नहीं हो सकती। लेकिन यह आस्‍था कि दृश्‍य जगत के पार कुछ है जो अज्ञात है, ताओ वाद की संवेदना का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। प्राचीन चीन में अल्‍केमिस्‍टों का एक संप्रदाय शारीरिक अमरता में विश्‍वास रखता था और उस दिशा में रसायनों की खोज करता था। लेकिन वे ताओ वाद की मुख्‍य धारा का हिस्‍सा कभी नहीं बने।
      ली तज़ु का दर्शन भी कहानियों से बना हुआ है। ये छोटी-छोटी कहानियां वह सब कह देती है जो बड़े-बड़े दर्शन शास्‍त्र नहीं कह पाते।
     
ली तज़ु की कहानियां
      ली तज़ु      ची जा रहा था लेकिन आधे रास्‍ते से वापस लौट आया। रास्‍ते में उसे पो हुन वू जेन मिला। उसने पूछा कि वह बीच में ही क्‍यों लौट आया?
      ‘’मैं किसी बात से चौंक गया, सावधान हुआ।‘’
      ‘’किस बात से?’’
      ‘’मैंने देस होटलों में खाना खाया और पाँच होटलों में उन्‍होंने मुझे पहले परोसा।‘’
      ‘’ अगर इतनी सी बात है तो तुम चौंक क्‍यों गये?’’
      ‘’जब व्‍यक्‍ति की आंतरिक एकात्मता दृढ़ नहीं होती तो उसके शरीर से कुछ रिसता है और उसके आभा मंडल में प्रविष्‍ट होता है। और वह बाहरी तल पर लोगों को उसे सम्‍मान देने के लिए विवश करता है। उससे वरिष्ठ और श्रेष्‍ठ लोगों की बजाएं। और उससे वह मुश्‍किल में पड़ जाता है।
      होटल वाले का एकमात्र मकसद उसके चावल और दाल बेचकर पैसा कमाना होता है। उसका लाभ बहुत थोड़ा है। अगर ऐसे लोग जिनको मेरे से इतना थोड़ा लाभ होना है, एक ग्राहक के नाते मेरी इतनी इज्‍जत करते है तो दस हजार रथों का मालिक, जिसके राजकाज में अपना शरीर जर्जर कर लिया है और अपना ज्ञान खाली कर लिया है। उसके साथ यह घटना और भी बदतर नहीं होगी? ची का राजकुमार मुझे किसी पर नियुक्‍त करेगा और आग्रह करेगा कि मैं कुशलता से काम करूं। इससे मैं सावधान हो गया।‘’
      बहुत बढ़िया नजरिया है। लेकिन तुम यहां रह गए तो बाकी लोग तुम पर जिम्‍मेदारी डालेंगे।‘’
      थोड़े ही समय बाद, जब पो-हुन बू-जेन ली तज़ु से मिलने गया तो ली तज़ु का बरामदा अतिथियों के जूतों से भरा हुआ था। पो-हुन-बू जेन उत्‍तर की और अभिमुख होकर खड़ा हुआ। (ली तज़ु गुरु के आसन पर दक्षिण की और अभिमुख था।) वहां कुछ देर खड़े रहने के बाद कुछ कहे बगैर वह चल दिया। द्वारपाल ने ली तज़ु को खबर की। ली तज़ु जूते हाथ में लेकर नंगे पाँव दौड़ पडा और द्वार के पास उसे पकड़ा।
      ‘’अब चुंकी आप आ गये। है महाराज क्‍या मुझे मेरी औषधि नहीं देंगे?’’
      ‘’पो-हुन-वू-जेन बोला, ‘’बहुत हो गया। मैंने तुझे विश्‍वास पूर्वक कहा था कि लोग तेरे ऊपर जिम्‍मेदारी डालेंगे। और उन्‍होंने डाल दी। ऐसा नहीं है कि तुम उन्‍हें रोकने में सक्षम नहीं हो। लोगों पर ऐसा प्रभाव पड़ने से तुम्‍हें क्‍या मिलता है। जो तुम्‍हारी अपनी शांति को भंग करता है? अगर तुम दूसरों को प्रभावित करना ही चाहते हो तो वह तुम्‍हारे बुनियादी केंद्र को विचलित कर देगा।‘’
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      त्‍झु कुंम पढ़ाई कर-करके थक गया। उसने कन्‍फ्यूशियस से कहा, ‘’मुझे विश्राम खोजना है।‘’
      ‘’जिंदा लोगों के लिए विश्राम नहीं है।‘’
      ‘’तो क्‍या मैं उसे कभी नहीं पा सकूंगा।‘’
      ‘’पाओगे। तुम्‍हारी कब्र के विशाल, गुंबद समान टीले की प्रतीक्षा करो, और जान लो कि तुम्‍हें विश्राम कहां मिलेगा।‘’
      ‘’मौत महान है। भद्र जनों को उसमे विश्राम मिलता है और क्षुद्र आदमी उसमे पनाह ढूँढता है।‘’
      त्झु कुंम, तुम समझ गये। सभी लोग जीवन की खुशी को समझते है। उसके दुःख को नहीं। बुढ़ापे की थकान को जानते है। उसकी सहजता को नहीं। मृत्‍यु की कुरूपता को जानते है। उसके विश्राम को नहीं।‘’
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      ली तज़ु हु तज़ु के साथ पढ़ाई कर रहा था। हु तज़ु ने उससे कहा, ‘’जब तुम पीछे रहना जानोंगे तब मैं तुम्‍हें सिखाना शुरू करूंगा कि कैसा आचरण हो।‘’
      ‘’कृपया कर मुझे पीछे रहना सिखाये।‘’
      ‘’तुम्‍हारी छाया को देखो और तुम समझ जाओगे।‘’
      ली तज़ु ने पीछे मुड़कर अपनी छाया का निरीक्षण किया। जब उसका शरीर झुका तब उसकी छाया तिरछी था। जब उसका शरीर सीधा था, तब छाया सीधी थी। तो झुकना या सीधे खड़े रहना शरीर पर निर्भर करता है न कि छाया पर। और हम सक्रिय हों या निष्‍क्रिय यह दूसरों पर निर्भर करता है, न कि स्‍वयं पर।
      ‘’पीछे रहकर आगे रहने का यहीं मतलब है।‘’
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      कुआन मिन न ली तज़ु से कहां, ‘’यदि तुम्‍हारे शब्‍द सुंदर या असुंदर है तो वैसी ही उसकी प्रतिध्वनि होगी। यदि तुम्‍हारी आकृति छोटी या लंबी हो तो वैसी ही उसी छाया होगी। शोहरत प्रतिध्‍वनि है। आचरण छाया है। इसलिए कहते है:
      अपने शब्‍दों के प्रति सावधान रहना।
      क्‍योंकि कोई न कोई उनसे सहमत होगा।
      अपने आचरण की फ्रिक करना
      कोई न कोई उसकी नकल करेगा।
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      कन्‍फूशियस लू-लियांग जलप्रपात को देख रहा था। पानी सौ फीट छलांग लगा रहा था। और तीस मील तक उसका फेन उछल रहा था। वह ऐसी जगह थी जहां मछलियाँ, कछुए और मगरमच्‍छ नहीं तैर सकते थे। लेकिन वहां उसने एक आदमी को तैरते हुए देखा। यह सोचकर कि कोई किस्‍मत का मारा अपनी जान देने पर उतारू है। उसने एक शिष्‍य को उस आदमी को बचाने के लिए भेजा। लेकि कुछ दूरी तक तैरने के बाद वह आदमी बाहर आया। और गुनगुनाता हुआ किनारे पर चलने लगा।
      कन्‍फूशियस ने उससे पूछा, ‘’मैंने सोचा तुम कोई भूत-प्रेत हो लेकिन तुम तो आदमी दिखाई देते हो। क्‍या मैं पूछ सकता हूं कि पानी से गुजरने का कोई तिलिस्‍म तुम्‍हें आता है।‘’
      ‘’नहीं कोई तिलस्‍म नहीं आता। मेरे लिए तो जन्‍म जाता है, उससे मैंने शुरू आत की है। जो नैसर्गिक है उसमे मैं पला और नियति पर श्रद्धा कर मैं प्रौढ़ हुआ। मैं भीतर आनेवाले के प्रवाह के साथ भँवर में उतरता हूं और बहार जानेवाले प्रवाह के साथ बाहर निकलता हूं। पानी पर अपने स्‍वभाव को थोपने की बजाये मैं पानी के स्‍वभाव के पीछे चलता हूं। इस प्रकार मैं पानी से संबंधित होता है।‘’
      ‘’क्‍या मतलब है तुम्‍हारा? थोड़ा स्‍पष्‍ट करोगे?’’
      ‘’मैं जमीन पर पैदा हुआ, इस लिए जमीन पर सुरक्षित हूं—यह जन्‍मजात है। मैं पानी पर पला इसलिए पानी में सुरक्षित हूं—ये नैसर्गिक है। और मैं बिना यह जाने उसे कहता हूं कि मैं यह कैसे करता हूं—यह नियति में श्रद्धा करना हुआ।‘’
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      ली तज़ु जरूरतमंद था। उसके चेहरे पर खाली पेट होने के निशान थे। एक अतिथि ने चेंग के मुख्‍य मंत्रि झु याँग से यह बात कही, ‘’ली तज़ु मार्ग को जानेवाला, ज्ञानी व्‍यक्‍ति है। अगर आपके राज्‍य में रहते हुए वह भूखा रहता है तो यह सोचा जायेगा कि आप उदार शास्‍ता नहीं है।‘’
      झु याँग ने फौरन आदेश देकर उसे भेंट स्‍वरूप आनाज भिजवाया। ली तज़ु उसके संदेश वाहक से मिलने बाहर आया। दो बार झुक कर धन्‍यवाद दिया और भेंट अस्‍वीकार कर दी।
      जब संदेशवाहक चला गया और ली तज़ु घर में आया तो उसकी पत्‍नी आंखे तरेरकर उसे देखने लगी और कहा, मैंने सुना है कि मार्ग को जाननेवाले ज्ञानियों के पत्‍नी और बच्‍चे आराम से रहते है। लेकिन अब, जबकि भुखमरी हमारे चेहरों पर लिखी हुई है, और मंत्रि आपको भोजन भेज रहा है, आप उसे लेने से इंकार कर रहे है। लगता है हमारे भाग्‍य में दुःख ही लिख हुआ है।‘’
      ली तज़ु ने मुस्‍कराते हुए कहा, ‘’ऐसा नहीं है कि मंत्रि मुझे निजी तौर पर जानता है, उसने किसी और के कहने पर मुझे अनाज भेजा है। मतलब, कभी वह मेरी निंदा भी करना चाहे तो वह दूसरे के कहने पर करेगा। इसलिए मैंने स्‍वीकार नहीं किया।‘’
ओशो का नजरिया:
      ली तज़ु पराकाष्‍ठा है ताओ त्‍ज़ु और च्‍वांग त्‍ज़ु की उसकी किताब अपरिसीम रूप से सुंदर है इसलिए मैं उसे अपनी सूची में सम्‍मिलित करता हूं।
ली तज़ु कौन था?
      पश्‍चिम के विद्वान ली तज़ु के बारे में परेशान रहे है—ऐसा कोई व्‍यक्‍ति हुआ भी या नहीं। यह काफी विवादास्‍पद है। उन्‍होंने इस पर कड़ी मेहनत की है कि ऐसा कोई व्‍यक्‍ति सचमुच में हुआ है। पूरब के लिए यह पूरी विद्वता मूर्खतापूर्ण है। यह कोई अर्थ नहीं रखता है कि ऐसा कोई व्‍यक्‍ति हुआ या नहीं। यदि तुम मुझसे पूछे कि वह हुआ या नहीं, मेरे लिए दोनों बराबर है। जिसने भी ये सुंदर कहानियां लिखी है, वह ली तज़ु है—कोई भी। एक बात तय है कि किसी ने ये सुंदर कहानियां लिखी है। इतना तो पक्‍का है। क्‍योंकि कहानियां है।
      अब, कहानियां ली तज़ु नाम के व्‍यक्‍ति ने लिखी है या किसी दूसरे नाम के व्यक्ति ने, उससे क्‍या फर्क पड़ता है? उससे कहानियों में कुछ जुड़ेगा नहीं, वे पूर्ण है। उससे कहानियां से कुछ कम नहीं होगा। ली तज़ु ऐतिहासिक व्‍यक्‍ति है या नहीं। यह इन कहानियों को कैसे प्रभावित कर सकता है? ये कहानियां इतनी सुंदर है, उनका अंतनिर्हित मूल्‍य है। एक बात तय है कि किसी ने उनको लिखा है—पर उसका नाम क्‍या था, इसे लेकिन परेशान क्‍यों हो, वह ली तज़ु था या कोई ओर?
      यह हो सकता है कि ये कई लोगों द्वारा लिखी गई हो, तब भी कोई समस्‍या नहीं है। जिसने भी ये कहानियां लिख है उसने ताओ की चेतना को जीया है। इसके बिना यह लिखी नहीं जा सकती। एक व्‍यक्‍ति ने लिखा हो या अनेक व्‍यक्‍तियों ने, परंतु जब भी ये कहानियां लिखी गई है कोई ताओ चेतना के गहरे में उतरा है, किसी ने जीवन का अर्थ जाना है। किसी के पास दर्शन है।
      ली तज़ु संदेहास्‍पद है। वह किसी भी तरह से ऐतिहासिक व्‍यक्‍ति नहीं है। उसने कोई पदचिह्न नहीं छोड़ा है। या तो वह कोई ऐतिहासिक व्‍यक्‍ति नहीं था। या कोई महान घोड़ा था। मेरे लिए ये गैर महत्‍वपूर्ण है। वह महान घोड़ा था जिसने कभी धूल नहीं उड़ाई और अपने पीछे कोई राह नहीं छोड़ी।
      उसने अपने आपको पूरी तरह से भुला दिया। मात्र यह छोटी-सी पुस्तक है—‘’दि बुक ऑफ ली तज़ु’’ इन छोटी सी कथाओं के साथ। यह ली तज़ु के बारे में कुछ नहीं कहती है।
      ली तज़ु हो सकता है। कि कोई स्‍त्री हो। वह हो सकता है कि आदमी हो। कौन जानता है? वह चीनी हो सकता है, वह तिब्‍बती हो सकता है। कौन जानता है? हो सकता है वह हुआ ही नहीं हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। परंतु इन कथाओं का मूल्‍य है। ये कथाएं द्वार है।
ओशो
ताओ, दी पाथलेस पाथ, भाग—2