जो घर बारे आपना-(साधना-शिविर)--ओशो
प्रवचन-पांचवां-(ध्यान का अनिवार्य तत्व: होश)
बहुत से प्रश्न मित्रों ने पूछे हैं।
एक मित्र ने पूछा है कि रात्रि का ध्यान का प्रयोग क्या
एकाग्रता का ही प्रयोग नहीं है? और इस प्रयोग के क्या परिणाम होंगे
और क्या आधार हैं?
एकटक
आंख को खुली रखना,
पहले तो संकल्प का प्रयोग है, आंख को बंद नहीं
होने देना। आंख को बंद नहीं होने देना, यह संकल्प का प्रयोग
है, विल-पावर का प्रयोग है। और अगर चालीस मिनट तक आंख खुली
रख सकते हैं, तो इसके बड़े व्यापक परिणाम होंगे। चालीस मिनट
मनुष्य के मन की क्षमता का समय है। इसलिए हम स्कूल में, कालेज
में चालीस मिनट का पीरिएड रखते हैं। चालीस मिनट जो काम हो सकता है पूरा, फिर वह कितना ही आगे किया जा सकता है। अगर आप चालीस मिनट तक आंख खुली रख
सकते हैं, यह छोटा सा संकल्प पूरा हो सकता है, तो इसके बहुत परिणाम होंगे।







