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शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

यादें और जीवन का बहा-मनसा-मोहनी

 यादें और जीवन का बहा-


जीवन को अगर हम देखे तो वह यादों का एक बहाव ही पाओगे। परंतु कुछ मील के पत्थर हमारे पूरे जीवन की दशा को प्रतिवर्तन कर देते है। ऐसी ही एक याद आज की यानि की 23 जनवरी 1979 जो आज से 47 साल पहले घटी थी। कैसा मधुर उन्माद आज भी मन के आंगन में गुदगुदाहट सी होने लग जाती है। जब जीवन के उन क्षणों को याद कर रहा हूं। वैसे तो हमारे जीवन की जिसने हमारे जीवन को ये मार्ग दिया या आज जहां हम खड़े है। उसकी भिन्न-भिन्न यादें है। या तिथि है। क्योंकि एक महा बाद यानि 26 फरवरी को 1976 को हम और मोहनी मिले थे। यानि अब करीब 50 साल का हमारा साथ हो रहा है। और यही साथ हमें ओशो के मार्ग पर लेकर गया है। शायद मैं भी इस मार्ग पर अकेला नहीं चल सकता था। और न ही मोहनी ही। परंतु जब दोनों ही अधूरे थे तो ओशो के मार्ग पर चल कर हम एक पूर्ण हुए। और दोनों ने जैसे जीवन के दक्षिणायन की यात्रा एक साथ शुरू की उसी तरह से जीवन का उत्तरायण पर भी एक साथ चले। यानि 23 जनवरी 1994 को पूना से एक ही दिन सन्यास लिया।

कितनी ही आनंद और पीडा की यादें इस बीच आई फिर भी जीवन धन्य है। परंतु और की इस मधुर छाव में कितनी ही तेज उष्ण की जलन जीवन में आई परंतु पल भर से अधिक वह रूक नहीं पाई। आज इतनी दूर आ कर भी जब पीछे मुड़ कर देखते है तो यकीन नहीं होता की क्या जहां से हम चले थे वहां से यहां पहुंचा जा सकता है। नहीं ये केवल ओशो ही बीच की वह कड़ी है। जिस के कारण ये सब घट रहा है। जीवन का मार्ग एक दम साफ दिखाई दे रहा है कोई अंधकार नहीं। कोई भटकाव नहीं। सब साफ नजर आता है। परंतु मार्ग की बाधा तो हमारे बस की बात नहीं। जब आप को नदी पार करनी है तो भीगना तो होगा। अब अगर भीगने को आप एक रूकावट या पीड़ा समझे तो ये हमारी भूल ही होगी। समस्या ये नहीं की हम भीगे। परंतु आनंद ये है की हम तैरना जान गये।

अब रास्ते उबड़-खबड़ या टेढ़े मेढ़े है तो इस की पीड़ा को सहना ही होगा। इसी सब का नाम तो जीवन है। अगर मार्ग पर एक चढ़ाई है तो थकावट होगी और गिरने का भय भी हमेशा बना रहेगा। परंतु अगर आप के पास सजगता है तो आप को भय कहां घेर सकता है।

इसी सब के बीच एक मित्र ने बुक फेयर से कुछ किताबें भेजी है। हम तो करीब पांच-छ: साल से बुक फेयर नहीं जा पाये। परंतु मित्र का ये उपहार अनमोल हे। सालों बाद भी उसको पता है मुझे कौन लेखक पढ़ना है। ये अनमोल उपहार हमारी शादी की 47 शादी की साल ग्रह का उपहार अनमोल है। प्रेम आभार प्रिय मित्र....परंतु उसने एक शर्त भी लिख है। की तुम मेरा नाम पोस्ट पर मत लिखना....परंतु आप की शर्त का मान रख रहा हूं। वरना तो आप नाम और यादें तो ह्रदय पर अंकित हे।

पुस्तकें-

01-क्या भूलूं क्या याद करूँ -बच्चन

02-नीड़ का निर्माण फिर -बच्चन

03-बसेरे से दूर-बच्चन

04-‘दश द्वारसे सोपानतक-बच्चन

05-भित्ति-भैरप्पा

06-सब झूठ है-विमल मित्र

07-जन गण मन -विमल मित्र

08-विराज बहू- शरत् चंद्र चट्टोपाध्याय

09-दत्ता- शरत् चंद्र चट्टोपाध्याय

10-देवदास- शरत् चंद्र चट्टोपाध्याय

11-परिणीता- शरत् चंद्र चट्टोपाध्याय

12-चरित्र हीन- शरत् चंद्र चट्टोपाध्याय

13-श्रीकांत-शरत् चंद्र चट्टोपाध्याय

14-ध्रुवस्वामिनी-जय शंकर प्रसाद

15-तितली-जय शंकर प्रसाद

16-गुण्डा और अन्य कहानियां-जय शंकर प्रसाद

17-छोटा जादूगर और अन्य कहानियां-जय शंकर प्रसाद

18-कामायनी-जय शंकर प्रसाद

19-कंकाल-जय शंकर प्रसाद

20-चन्द्रगुप्त-जय शंकर प्रसाद

21-मधुआ और अन्य कहानियां-जय शंकर प्रसाद

मनसा-मोहनी दसघरा

 

 

 

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