शिक्षा में क्रांति-ओशो
प्रवचन-बारहवां
विद्रोह की आग
मेरे प्रिय आत्मन्!
जरथुस्त्र एक पहाड़ से नीचे उतर रहा था। वह
बहुत तेजी में था, जैसे कोई बहुत जरूरी खबर पहाड़ के नीचे ले जानी हो। भागता
हुआ और हांफता हुआ वह बाजार में पहुंचा, मैदान में नीचे।
बाजार की भीड़ में चिल्ला कर उसने पूछा कि तुम्हें कुछ पता चला? हैव यू गाट दि न्यूज, तुम्हें खबर मिली? लोग पूछने लगे, कौन-सी खबर? तो
जरथुस्त्र हैरान हो गया--इतनी बड़ी घटना घट गई है और तुम्हें पता नहीं! तुम्हें खबर
नहीं मिली कि ईश्वर मर गया है! लोग बहुत हैरान हुए। फिर जरथुस्त्र को लगा कि शायद
वह जल्दी आ गया है, लोगों तक अभी खबर नहीं पहुंची है। मैं यह
घटना पढ़ रहा था और मुझे लगा कि लोगों तक कोई भी महत्वपूर्ण खबर कभी भी नहीं
पहुंचती है। और जो भी खबर लाते हैं, उन सभी को ऐसा लगता है
कि शायद वे समय से पहले आ गए हैं, जल्दी आ गए हैं।






