जो घर बारे आपना-(साधना-शिविर)--ओशो
प्रवचन-दूसरा-(ध्यान के संबंध में)
मेरे प्रिय आत्मन्!
ध्यान के संबंध में दोत्तीन बातें हम समझ लें, और फिर प्रयोग के लिए बैठेंगे।
एक बात तो यह समझ लेनी जरूरी है, ध्यान में हम सिर्फ
तैयारी करते हैं, परिणाम सदा ही हमारे हाथ के बाहर है। लेकिन
यदि तैयारी पूरी है, तो परिणाम भी सुनिश्चित रूप से घटित
होता है। परिणाम की चिंता छोड़ कर श्रम की ही हम चिंता करें। और परिणाम की चिंता
छोड़ कर पूरी चिंता हम अपने श्रम की कर सकें, तो परिणाम भी
सुनिश्चित है। लेकिन परिणाम की चिंता में श्रम भी पूरा नहीं हो पाता और परिणाम भी
अनिश्चित हो जाते हैं।











