प्रेम-रंग-रस ओढ़ चुंदरिया-(दूल्हन)
प्रवचन-आठवां
दिनांक : 08-फरवरी, सन् 1979;
श्री ओशो आश्रम, पूना।
प्रश्नसार:
1—भगवान! मनुष्य इस संसार में रह कर परमात्मा को कभी नहीं पा
सकता है, यह मेरा कथन है। क्या यह सच है?
2—भगवान! क्या आप सामाजिक क्रांति के विरोधी हैं?
3—मेरे, मेरे, हां मेरे भगवान!
अधरों से या नजरों से हो वह बात, भला क्या बात हुई!
तू कर जो भी तेरा जी चाहे।
4—भगवान! आप मेरे अंतर्यामी हैं। क्या मेरे हृदय में मीरां और
चैतन्य
के से प्रेम के गीत फूटेंगे? क्या उनकी तरह मैं पागल हो कर
नाच सकूंगा?
5—भगवान! संतन की सेवा का इतना महत्त्व क्यों है?





