कथा—छठवां -(संत औगास्टिनस)
विचार से सत्य नहीं पाया जा सकता है।
क्योंकि, विचार की सीमा है और सत्य असीम है।
क्योंकि, विचार की सीमा है और सत्य असीम है।
विचार से सत्य नहीं पाया जा सकता है।
क्योंकि, विचार ज्ञात है और सत्य अज्ञात है।
क्योंकि, विचार ज्ञात है और सत्य अज्ञात है।
विचार से सत्य नहीं पाया जा सकता है।
क्योंकि, विचार शब्द है और सत्य शून्य है।
क्योंकि, विचार शब्द है और सत्य शून्य है।
विचार से सत्य नहीं पाया जा सकता है।
क्योंकि, विचार एक क्षुद्र प्याली है और सत्य एक अनंत सागर है।
क्योंकि, विचार एक क्षुद्र प्याली है और सत्य एक अनंत सागर है।
संत औगास्टिनस एक सुबह सागर तट पर
था। सूर्य निकल रहा था और वह अकेला ही घूमने निकल पड़ा था। अनेक रात्रियों के जागरण
से उनकी आँखें थकी-मंदी थी। सत्य की खोज में वह करीब-करीब सब शांति खो चुका था।











