ऐ खुब सूरत रंगीन श्याम
तुम्हारा ये लावण्य रूप-रंग
ये सम्मोहन, मादकता सा
कैसे लवरेज है प्रेम प्रति सा
मानों दो का मिलन
भी बन गया एक पूर्णता सा
तुम क्या रात की खामोशी में
खोने चली हो अपने होने को
वहां शांति है एक मरघट सी
वो तुझे मिटने का
अहसास नहीं कराता
कि कुछ पल बाद तेरे ये रंग रूप
ये आकार सब विलीन हो जायेंगे
गजब का साहास है तुझमें
प्रियतम से मिलने का
परंतु मैं जानता हूं
तू चली है कुछ नये का
अंकुरण करने के लिए,
एक रहस्य में प्रवेश करने
पर जरा संभल कर रहना वहां
तुझे मिलेगा मेरा दिलबर,
जो तक रहा मेरी आने की राह
चाहे तो तू उसके कानों में कहना
मेरे ह्रदय की बात
या बतलाना मेरी इस तड़प को
और कहना दूर आ राह है कोई
तुम बस यूं ही सजी रहना
हो सकती है
वो करे तुझ पर विश्वास।
तुम बता सकती है
मेरे मन की उस पीड़ा को
जो तड़प रहा है उसके लिए,
पर देखना मैं जानता हूं
तू नहीं बतलायेगी,
मैं जानता हूं,
तुम उसकी तड़प को देख कर
भूल जाओगी मेरी पीड़ और तड़प को
देखना तुम समा जाओगी
जाकर उसकी आगोश में
और खो जाओगी
केवल उसी की होकर,
कितने युग काल खो गये
उसकी गोद से बिछुड़े हुए
लोरी सुनते-सुनते तुझे
करती थी वो लाड़ दुलार
उस अंधकार में जन्म लेता है
प्रेम का अंकुरण कोई
क्योंकि वहीं तो होता है
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