पद घुंघरू बाँध—(मीरा
बाई)
ओशो
(ओशो द्वारा मीरा बाई के
पदों पर दिये गये बीस अमृत प्रवचनों का अमुल्य संकलन)
प्रेम मीरा की इस झील में तुम्हें निमंत्रण देता
हूं। मीरा नाव बन सकती है। मीरा के शब्द तुम्हें डूबने से बचा सकते हैं। उनके
सहारे पर उस पार जा सकते हो।
मीरा तीर्थंकर है। उसका शास्त्र प्रेम का
शास्त्र है। शायद शास्त्र कहना भी ठीक नहीं।
नारद ने भक्ति-सूत्र कहे; वह
शास्त्र है। वहां तर्क है, व्यवस्था है, सूत्रबद्धता है। वहां भक्ति का दर्शन है।
मीरा स्वयं भक्ति है। इसलिए तुम रेखाबद्ध
तर्क न पाओगे। रेखाबद्ध तर्क वहां नहीं है। वहां तो हृदय में कौंधती हुई बिजली है।
जो अपने आशियाने जलाने को तैयार होंगे, उनका ही संबंध जुड़ पाएगा।
प्रेम से संबंध उन्हीं का जुड़ता है, जो
सोच-विचार खोने को तैयार हों; जो सिर गंवाने को उत्सुक हों।
उस मूल्य को जो नहीं चुका सकता, वह सोचे भक्ति के संबंध में,
विचारे; लेकिन भक्त नहीं हो सकता।


