(सदमा - उपन्यास)
सोनी ने घर जाकर पहला काम यह किया की। उसने पहले बम्बई (मुम्बई) के नम्बर पर जो नेहालता के माता-पिता का वह लिख कर लाई थी। उस पर ट्रंकाल बूक कराया। शायद श्याम तक मिल जाये। परंतु उन्हें ये संदेश तो देना जरूरी था की उनकी लड़की यहां ठीक ठाक पहुंच गई है। नेहा लता ने वैसे यह भी कह दिया था की वह चिट्ठी भी लिख देगी। परंतु पत्र को पहुंचने में तो कम से कम एक हफ्ता तो लग ही जायेगा। वह अपने दिल और यहां का हाल अपने माता-पिता को जब पत्र में लिखेगी तो उसे पढ़ कर उन्हें सब हाल मालूम हो जायेगा। परंतु अब कम से कम इतना तो संदेश पहुंच जाये की नेहा लता हजारों मील यहां पर ठीक ठाक पहुंच गई है। वैसे वह चाह रही थी की अगर एक फोन वह पेंटल को भी कर दे तो अच्छा होगा। परंतु इतनी देर में पेंटल का फोन आ गया। नेहालता ने उसे उठा कर हाल चाल पूछा और बतला दिया की नेहालता यहां आराम से पहुंच गई है। आप फिक्र ने करें। मैं अभी वही से आ रहा हूं हमने साथ ही खाना खाया है। वह बहुत ही प्रेम पूर्ण लड़की है इतने लाड़ प्यार से पलने के बाद भी उस में जरा भी अहंकार नहीं है। अपने माता पिता के धन का वैभव का।


























