तंत्र-सूत्र—विधि—32 (ओशो)
देखने के संबंध में तीसरी विधि:
देखने के संबंध में तीसरी विधि:
‘’किसी
सुंदर व्यक्ति
या सामान्य
विषय को ऐसे
देखो जैसे उसे
पहली बार देख
रहे हो।‘’
पहले कुछ
बुनियादी
बातें समझ लो,
तब इस विधि का
प्रयोग कर
सकते हो। हम
सदा चीजों को
पुरानी आंखों
से देखते है।
तुम अपने घर
आते हो तो तुम
उसे देखे बिना
ही देखते हो।
तुम उसे जानते
हो, उसे देखने
की जरूरत नहीं
है। वर्षों से
तुम इस घर में
सतत आते रहे
हो। तुम सीधे
दरवाजे के पास
आते हो, उसे
खोलते हो और
अंदर दाखिल हो
जाते हो। उसे
देखने की क्या
जरूरत है?





















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