आठवां प्रवचन—अनंत के आंगन में नृत्य है भक्ति
दिनांक १८ जनवरी, १९७६; श्री रजनीश आश्रम, पूना
प्रश्नसार
1—प्रेम भक्ति का जनक है या भक्ति प्रेम की जननी ? प्रेम कली है और भक्ति फूल? अथवा प्रेम आदि है और
भक्ति अंत? या दोनों भिन्न हैं?
2—इस कथन में क्या सच्चाई है कि भक्ति है द्वैत
और ज्ञान है अद्वैत?
3—संन्यास के लिए गैरिक वस्त्र क्यों जरूरी हैं?
4—सुरक्षा के लिए मुझे जो नाटक करना पड़ता है, उसे करूं या छोड़ दूं?
5—अगर ज्ञान भक्ति के लिए बाधा है, फिर महातार्किक और महापंडित चैतन्य एकदम से भक्त कैसे हो गए?
6—सैकड़ों बार भ्रम के टूटने पर भी भरोसा नहीं
आता। क्या करूं?
7—भक्त कण-कण में भगवान को देखता है। लेकिन जिसे
सिर्फ आपका पता है, कण में बसनेवाले भगवान का नहीं,
उसके लिए क्या साधना होगी?








