ख्याल
रहे वे भी शक्तियां
है, अगर बाहर
की और जाना हो
तो—लेकिन अगर
भीतर जाना हो
ता यहीं शक्तियां
बाधाएं बन
जाती है। अगर
व्यक्ति स्वयं
के भीतर जा
रहा हो, तो यही
शक्तियां
बाधा बन
जायेगी।
जो
व्यक्ति बह्या
संसार की और
बढ़ रहा होता
है, वह चंद्र
से सूर्य की और
से होता हुआ
संसार में जा
रहा होता है।
और जो व्यक्ति
स्वयं के
भीतर जा रहा
है, उसकी
ऊर्जा सूर्य
से चंद्र की
और, और फिर
चंद्र से भी
पार की तरफ जा
रही होती है।
जो व्यक्ति
अंतस की
यात्रा पर जा
रहा होता है।
और एक वह व्यक्ति
जो बह्या
संसार की
यात्रा पर जो
रहा होता है
उनके लक्ष्य
और उद्देश्य
एकदम अलग-अलग
होते है, एकदम
विपरीत होते
है।
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