ध्रुव-नक्षत्र
पर संयम संपन्न
करने से
तारों-नक्षत्रों
की गतिमयता का
ज्ञान प्राप्त
होता है।
और
हमारे
अंतर-अस्तित्व
का ध्रुव तारा
कौन सा है?
ध्रुव तारा
बहुत
प्रतीकात्मक
है। पौराणिक
कथाओं के
अनुसार यही
समझा जाता है
कि ध्रुव तारा
ही एक मात्र
ऐसा तारा है,
जो पूर्णतया
गति विहीन है,
उसमें कोई गति
नहीं है, वह
थिर है। लेकिन
यह बात सच नहीं
है। उसमें गति
है, लेकिन
उसकी गति बहुत
धीमी होती है।
लेकिन फिर भी
यह बहुत
प्रतीकात्मक
है: हमको अपने
भीतर कुछ ऐसा
खोज लेना है
जो कि गति
विहीन हो,
जिसमे किसी
प्रकार की गति
न हो, पूरी तरह
थिर हो। वहीं
हमारा स्वभाव
है, केवल वहीं
हमारी वास्तविक
अस्तित्व
है। हमारा सच्चा
स्वरूप है: ध्रुव
तारे जैसा—गति
विहीन,
पूर्णरूपेण
गति। क्योंकि
जब भीतर कहीं
गति नहीं होती
है, तब शाश्वतता
होती है। जब
गति होती है,
समय भी होता
है।
और
हमारे
अंतर-अस्तित्व
का ध्रुव तारा
कौन सा है?
ध्रुव तारा
बहुत
प्रतीकात्मक
है। पौराणिक
कथाओं के
अनुसार यही
समझा जाता है
कि ध्रुव तारा
ही एक मात्र
ऐसा तारा है,
जो पूर्णतया
गति विहीन है,
उसमें कोई गति
नहीं है, वह
थिर है। लेकिन
यह बात सच नहीं
है। उसमें गति
है, लेकिन
उसकी गति बहुत
धीमी होती है।
लेकिन फिर भी
यह बहुत
प्रतीकात्मक
है: हमको अपने
भीतर कुछ ऐसा
खोज लेना है
जो कि गति
विहीन हो,
जिसमे किसी
प्रकार की गति
न हो, पूरी तरह
थिर हो। वहीं
हमारा स्वभाव
है, केवल वहीं
हमारी वास्तविक
अस्तित्व
है। हमारा सच्चा
स्वरूप है: ध्रुव
तारे जैसा—गति
विहीन,
पूर्णरूपेण
गति। क्योंकि
जब भीतर कहीं
गति नहीं होती
है, तब शाश्वतता
होती है। जब
गति होती है,
समय भी होता
है।
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